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                                  पिया हमारे लल्लनटाॅप
                शादी के बाद से हमारे वो काफी बदल गये हैं। पहले बताया था शराब नहीं पीते हैं, बीड़ी सिगरेट का शौक नहीं है, गुटखा को हाथ भी नहीं लगाते और अच्छा कमा लेते हैं। पर शादी के बाद पता चला कि मोहल्ले में अक्सर पानी की किल्लत रहती है। बाल्टियां हाथ में लिए सरकारी नल के आगे खड़े खड़े रातें बीतती हैं तो पिया जी इस किल्लत को दूर करने के लिए पानी कम मिला कर शराब ज्यादा पी लेते हैं। मोहल्ला ज्यादा बड़ा नहीं है तो पियाजी को ढूंढने में बहुत ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती, कभी उनका कोई सखा तो कभी मोहल्ले के केाई भले बच्चे दरवाजे तक घसीट कर देहली पर लिटा जाते हैं वरना तो कभी कभी अपने दम पर भी घर पंहुचते ही हैं। वैसे सही बात है बाड़ी सिगरेट का उन्हे शौक नही है, बल्कि लत है। 2 3 बंडल खतम कर देना शौक नहीं होता जुनून कहलाता है। हमारे इनके लिए तो सारी कायनात एक तरफ बीड़ी चाय एक तरफ। हमारे ये बताते हैं कि ‘हम शरीर के लिए तो व्यायाम कर लेते हैं पर मुँह के लिए तो बीड़ी पीकर ही व्यायाम होता है।‘ इस बीच हमने ये भी सीखा कि गुटखा को तो हाथ लगाने की जरूरत ही नहीं है। ऊपर से पाउच फाड़ा और सर्र्र से सारा मुँह में खाली कर लिया। अब बताओ गुटखे को कहां हाथ लगा। और उन्होने ये भी बताया कि गुटखा खाने से मुह में रस बना रहता है , चेहरा भी रसीला रहता है। होंठों में लाली बनी रहती है तभी तो तुमने हमको पहली झलक में ही पसंद कर लिया था। पाउच में कैसा भी चित्र डरावना बना लें हमने कौन सा पाउच खाना है, ये पैकेट के डरावने आॅपरेशन वाले चेहरे देखकर डरने वालों में से हम नहीं हैं। रही बात पैसा कमाने की तो हमारी एक कम्पनी है, पार्टनर कभी कभी बदलते रहते हैं। सब लोग मिल कर इन्वेस्ट करते हैं। एक बार में एक ही आदमी सारा प्राॅफिट ले जाता है फिर अपनी बारी के इंतजार में सब दांव लगाये बैठे रहते हैं। कभी कभार घाटा भी आ जाता है पर जीवन में बिना रिस्क के क्या मजा है। लोग कहते हैं जुआ कोई रोजगार नहीं है और बुरी बात भी है पर मैं कहता हूंँ सफलता की 1 प्रतिशत भी उम्मीद होने पर भी टिका रहने वाला आदमी ही सच्चा वीर है। मैं हार नहीं मान सकता फिर जब तक नौकरी नहीं मिल जाती घर का और मेरी शराब का खर्चा कैसे चलेगा पगली। इतना समझा कर वो चल दिये।


     
                        पिया जी की इन बुरी आदतों से दुखी होकर मैंने भी अब विरोध करने का मन बना लिया है और मैं भी जा पहुंची पड़ोस में खुल रहे शराब के ठेके के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने तो देखा की ठेके से शराब खरीद रहे हमारे उनकी सुरक्षा में तो 6-7 पुलिस वाले डण्डे लेकर खड़े हैं जो हम लोगों से कह रहे हैं, इधर आकर तो देखो जरा। आज जाकर लगा कमाते कुछ नहीं हैं तो क्या हुआ, लाख बुराइयां हों इनमें पर आज सिर्फ एक गुण के कारण इनको इतनी सुरक्षा मिली है, और मैं पगली इन्हें समझाने चली थी। सरकार हर किसी को ऐसे ही थोड़े ना दे देती है पुलिस सुरक्षा। कितना गलत सोचती थी मैं इनके बारे में। वैसे भी  मैं ठहरी हाईस्कूल, क्या जानती हूं। सरकार ने ठीक ही किया होगा। शायद हमें ज्यादा जरूरत शराब की ही होगी। शायद मुझे ही सोच बदलनी होगी क्योंकी पति तो परमेश्वर होते है और परमेश्वर कभी गलत नहीं हो सकते। पता नहीं आज शाम अपने परमेश्वर को ढूढने किस सड़क कि ओर जाना पड़ेगा।


     

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