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जी यस, टी
प्रधानमंत्री मोदी जी चाय वाले से तरक्की करते करते षिखर पर पहुंच गए हैं पर आज तक अपनी जड़ों को नहीं भूल पाए हैं तभी तो हर मौके पर चाय चरहे अनचाहे चाय का जिक्र हो जाता है। चाहे वह मन की बात हो या फिर विदेश में कोई राजनीतिक मंच वैसे भी आजकल देश या तो चाय पर चर्चा कर रहा है या गाय पर। गाय पर ज्यादा चर्चा हो रही है तो चाय की ओर को भी ध्यान देना जरूरी है। चाय की चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए मोदी जी ने सार्थक कदम उठाया है। कांग्रेस ने अपने पिछले कार्यकाल में जीएसटी लाने का मन बनाया था मगर उस समय भाजपा ने इस जीएसटी बिल का प्रबल विरोध किया था पर सत्ता में आने के बाद मोदी जी को एहसास हुआ कि जीएसटी देश के लिए गलत हो ही नहीं सकता क्योंकि जिसके नाम के साथ चाय या टी जुड़ा हो वो देषके लिए हानिकारक हो ही नहीं सकती। जी एस टी के नाम के अंत में टी अर्थात चाय शब्द जुड़ा है। चाय से जुड़ी हर चीज भारत के लिए फायदेमंद है भारत की अर्थव्यवस्था चाय से होकर जाती है जहां आदमी है सुबह होते ही चाय पीता है बिना चाय के ना उसकी सुबह खुलती है और ना उसका शरीर। बिना चाय और बिना चाय वाले के वर्तमान सामय में भारत के लोगों की स्थ्तिि क्या होती इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। संसार में सबसे ज्यादा चाय उत्पादक भारत करता हैै योग और चाय के साथ् ही तो विदेशी लोग भारत का नाम जोड़ते हैं।
 अपने पुराने दिनों को याद करके मोदी जी की आंखें तब भर आई जब उन्होंने पहली बार विधानसभा में जीत दर्ज की थी और एक नए कपड़े में सजे वेटर ने उनसे पूछा सर ‘वुड यू लाइक टू हैव सम टी आॅर काफी/क्या आप चाय या काॅफी कुछ लेना चाहेंगे‘। रुंधे हुए गले से उन्होंने उसी की भाषा में से जवाब देते हुए कहा - जी यस, टी (जी हां चाय)। और ऐसे ही तीन षब्द जीएसटी हैं जो भारत का भविश्य बदलने पर तुले हैं।
जीएस टी लागू होने का जष्न आधी रात को मनाया गया। लेट नाइट पार्टी का आयोजन था। मनमोहन सिंह जी को भी बुलाया था पर लेट नाइट पार्टियों से परहेज के करण मनमोहन जी वहां नहीं जा सके। राहुल जी को जब पता चला तो उन्होने मीडिया से कहा कि ‘इतनी रात को 12 बजे से ये पार्टी रखने की जरूरत ही क्या है जब 10 बजे के बाद डीजे ही नहीं बजने देते।‘
 बिल का विरोध अन्य व्यापारी कर रहे हैं, टी स्टाल वालों का इस बिल पर कोई विरोध नहीं है वे लोग बिरादरी के साथ खड़े हैं। सरकार व्यापारियों से कह रही है पहले पहले थोड़ी परेशानी होगी बाकी कुछ समय बाद सब ठीक हो जाएगा। नोटबंदी वाला यह डायलॉग फिर से हवाओं में गूंज रहा है। आदमी को खुश करने का सबसे आसान सबसे सस्ता तरीका है भविष्य के सुंदर-सुंदर दिखाना। जैसे हाथ देखने वाले कहते हैं भविष्य तो अपने बहुत सुंदर है बस आपने थोड़ा हवन करना पड़ेगा पंडित जी को थोउत्रा दान देना पड़ेगा, बाकी सब पंडित जी ठीक कर देंगे। षुरू षुरू में थोड़ा खर्चा होगा, थोड़ी परेशानी होगी आगे सब बढ़िया हो जाएगा। और जिस हवन को अन्ये पंडित जी ने पहले बताया था उसे ढकोसला बता कर अब उसी हवन से हमारा भविश्य सुधारने की प्रक्रियाऐं चली हैं। वैसे ष्ुरूआत चाहे जैसे भी हो कार्य अगर बेहतर भविश्य के लिए योजनाबद्व तरीके से हो तो उसका स्वागत होना चाहिए, और अगर सफल नहीं हुआ तो विपक्ष को भी तो लड़ने के लिए मुद्दों की जरूरत पड़ती रहेगी। परिणाम जो भी हो अब कुछ समय के लिए अब हर जुबान पर होगा बस, जी एस टी और टी वाला।

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ं     अच्छा चलता हूं, चुनावों में याद रखना   पिछले बार के चुनावों में दिखे नेता जी लोग एक बार फिर लोगों के दर्षन के लिए उपलब्ध हो चुके हैं। प्र्याप्त समय और पर्याप्त घोशणाओं के साथ पूरे न हो सके सपनों की एक लिस्ट भी मौजूद है जो पिछले कार्यकाल में या इस दरम्यान विपक्षियों के शड़यन्त्रों के कारण पूरी नहीं हो सकी थी पर इस बार जरूर पूरी होनी है। इस बार हर गांव में रोड आ जानी है और पानी भी हर गांव घर में आ जायेगा। लाइट की कोई समस्या अब नहीं रहेगी। हांॅस्पिटल और स्कूल में अब अच्छी सुविधाऐं मिलेंगी और ये सब चमत्कार कौन करेगा ? आप लोग। हम लोग, वो कैसे ? फलां नेता जी को अपना अमूल्य मत देकर। नेताजी की पहुंच बहुत ऊपर तक है। आपका लड़का क्या कर रहा है? बेरोजगार है, नेता जी से मिल लो, लड़के की नौकरी भी लगा देंगे। ऐसे ही दिलखुष सब्जबाग दिखाते नेतागण इस बीच दिखते रहेंगे और इन दिवास्वप्नों में उड़ने के लिए हम लोगों के पास दो माह का पर्याप्त समय है। साल के कुछ समय आदमी ने खुष भी रहना चाहिये। स्वास्थ्य सही रहता है और सकारात्मक विचार आते रहते हैं। षायद इसी सोच को मध्येनजर रखते हुए भारत में हर ...